बढ़ते बच्चों को सिखाइए पैसे से जुड़े सबक


Photo: Murali Nath | Dreamstime.com

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कई अभिभावक अपने बढ़ते बच्चों को अतिरिक्त दबाव से मुक्त रखने के विचार से उन्हें परिवार के वित्तीय मामलों से दूर रखते हैं लेकिन बच्चों को धन से जुड़े मामलों में इस उम्र में शिक्षित करने से वह निकट भविष्य में आर्थिक प्रबंधन सीख सकते हैं।

शिक्षा में अच्छे अंकों से पास होने जितना ही महत्वपूर्ण है धन के प्रबंधन में कुशल होना। यह ज़िंदगी का अहम सबक है जो बचत करना, बजट बनाना आदि सिखाकर एक बेहतर जीवन जीना सिखाने में मदद करता है। जिस तरह से गणित, इतिहास और विज्ञान के सबक आपके बढ़ते बच्चों को दुनिया को समझने में मदद करते हैं, उसी तरह धन के सिद्धांत समझने से बढ़ता बच्चा निकट भविष्य में दुनिया का सामना करने के लिए तैयार होता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि वित्तीय शिक्षा छात्रों के पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण ढंग से शामिल की जाना चाहिए और स्कूलों को इस विषय के लिए और समय देना चाहिए। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, अभिभावकों को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि धन का इस्तेामल कैसे करते हैं, उसके लिए काम कैसे करते हैं और उसका प्रबंधन कैसे किया जाता है ताकि धन का अभाव न रहे।

बच्चे को यह सब सिखाने का एक अच्छा तरीका यह है कि उसे आप एक मासिक या साप्ताहिक राशि दें। अपने बच्चे को यह राशि अपनी इच्छाओं और ज़रूरतों पर खर्च करने को कहें जैसे खिलौने या खाने-पीने पर। यह राशि बहुत ज़्यादा नहीं हो लेकिन बहुत

कम भी न हो। इतनी हो कि बच्चा इसको ठीक ढंग से इस्तेामल करने के बारे में सोचे और उसे मालूम रहे कि अपनी इच्छाओं और पूरे हफ्ते या महीने के बीच इस राशि से संतुलन बनाना है। इससे आपका बच्चा यह भी सीखेगा कि बचत कैसे की जाती है और बड़ी खरीदारी के लिए राशि कैसे जोड़ी जाती है।

एक तरीका यह है कि आप उसे घर के कुछ काम करने को कहें और इसके एवज़ उसको एक राशि पुरस्कार स्वरूप देने का वादा करें। उसे यह समझा दें कि अगर घर के काम वह ठीक तरह से करेगा तब ही उसे यह राशि मिलेगी।

मेनस्ट्रीट.कॉम के अनुसार वित्तीय प्रोफेशनल यह सलाह भी देते हैं कि आपके बच्चे को दान करने की शिक्षा भी मिलना चाहिए। यह एक अच्छा सबक हो सकता है कि आप उसे प्रोत्साहित करें वह अपनी बचत या पुरस्कार राशि का एक हिस्सा दान करे। इससे उसमें दया की भावना औश्र धन के प्रति सम्मान का भाव पैदा होगा और वह उन बच्चों की मदद कर सकेगा जो इतने भाग्यशाली नहीं होते कि उन्हें नियमित रूप से धन प्राप्त हो सके।

तो जब बच्चों को धन संबंधी सबक देने की बात आती है, तो ऐसा न सोचें कि अभी कमाई, खरीदारी या बचत के सबक सिखाने का समय नहीं आया है।

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