पॅट्स के टीकाकरण से आपका भी बचाव होता है


पॅट्स के टीकाकरण से आपका भी बचाव होता है

Photo: Shutterstock

कई लोगों के लिए पॅट्स परिवार का अभिन्न हिस्सा होते हैं। लेकिन, एक बीमार पॅट चिंता का विषय हो सकता है और रोग उसके लिए घातक भी हो सकता है। मनुष्यों की ही तरह, पॅट्स को भी कई संक्रामक रोगों से सामान्य टीकाकरण द्वारा बचाया जा सकता है। इसके अलावा, इस टीकाकरण का एक लाभ यह भी है कि कुत्तों से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोगों से भी बचा जा सकता है। अगर आप किसी नेय पपी या बिल्ली को घर लाये हैं तो पुश चिकित्सक की सलाह के अनुसार उसे सही समय पर टीके लगवाने के बारे में सलाह लें।

पपी और बिल्ली के बच्चे जन्म के बाद अपनी मां के दूध पीने के कारण शुरुआत में ही एंटीबॉडीज़ का सेवन कर लेते हैं इसलिए कुछ रोगों से बच जाते हैं। लेकिन यह भी तभी संभव है जबकि उनकी मां को सही टीकाकरण मिला हो और उसके दूध में एंटीबॉडीज़ हों। कुत्ते या बिल्ली के बच्चों को शुरुआत में ही संक्रमणों से बचने के लिए टीकों की ज़रूरत होती है। पॅट्स के टीकाकरण से संबंधित कुछ बिंदुओं को ध्यान में रखें।

कब लगवाएं टीके

कुत्तों को आठ से दस सप्ताह के बीच की उम्र में टीके लगवाने चाहिए। बिल्ली के बच्चों को नौ से बारह सप्ताह की उम्र की बीच। शुरुआती टीकाकरण के लगभग एक साल बाद पॅट्स् को एक बूस्टर दिया जाता है। जैसे-जैसे आपका पॅट बड़ा होगा, उसकी प्रतिरोधी क्षमता कम होती जाएगी और ऐसे में अपने पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ज़रूरी चिकित्सा करवाएं। यह आपके पॅट की ज़रूरतों और रोगों के अनुसार निर्भर करेगा।

कौन से टीके ज़रूरी हैं

डॉग्सइंडिया.कॉम के अनुसार, पपीज़ को आठ से दस सप्ताह की उम्र के बीच कैनाइन पर्वावायरस, कैनाइन डिस्टेम्पर वायरसख् लेप्टसपायरोसिस, संक्रामक कैनाइन हेपेटाइटिस, कॉरॉना वायरल एंटेरिटस और कैनाइन पैराइन्फ्लुएंज़ा जैसे रोगों से बचाने के लिए सामान्य रूप से टीके लगवाए जाते हैं। तीन महीने की उम्र में उन्हें रैबीज़ प्रतिरोधी टीका लगवाया जाता है।

बिल्ली के बच्चों को रैबीज़, फेलाइन संक्रामक एंटेरिटिस, फेलाइन हर्प्स वायरस, फेलाइन ल्यूकेमिया वायरस और फेलाइन कैलिसिवायरस से बचाव के लिए टीके लगवाये जाते हैं।

बचाव में लगता है समय

अगर आपके पॅट को टीका लग गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह तुरंत रोग से बचने में समर्थ है। टीके को प्रभवी होने में समय लगता है, जब टीके के ज़रिये डाले गये पदार्थ प्रतिरोधी तंत्र में शामिल होते हैं और एंटिबॉडीज़ का उत्पादन करना शुरू करते हैं तब रोगों से लड़ने की क्षमता बनती है। सामान्य रूप से, इस प्रक्रिया में टीका लगवाने के बाद कुछ दिन का समय लगता है। पपीज़ के मामले में, टीका लगवाये जाने के करीब 14 दिन बाद उनके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए पूरा सुरक्षा कवच तैयार हो जाता है। तो ज़रूरी है कि टीका लगवाने के बाद आप अपने पॅट को जोखिम वाले वातावरण से बचाकर रखें, कम से कम दो हफ्तों तक।

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