
अगर आप एक हेल्दी जीवन शैली अपनाना चाह रहे हैं तो, बजाय सब कुछ बदलने के, एक समय में कुछ ही व्यावहारिक और सरल बदलाव करें।
अगर आप एक हेल्दी जीवन शैली अपनाना चाह रहे हैं तो, बजाय सब कुछ बदलने के, एक समय में कुछ ही व्यावहारिक और सरल बदलाव करें।
पूरे भोजन के बाद और खा लेना, शकर, कार्ब और वसा की अधिकता वाले भोजन की लालसा बने रहना, ऐसे भोजन के प्रति अपराध बोध या शर्म का भाव आना भोजन की लत होने के लक्षण हैं जो वास्तव में व्यवहार संबंधी डिसॉर्डर है।
डेंगू के लक्षण, इलाज और उससे बचाव की जानकारियां रखेना ज़रूरी है ताकि आप और आपका परिवार सेहतमंद रह सके।
एक अध्ययन के अनुसार अगर आप रोज़ाना लिये जाने वाले शकरयुक्त ड्रिंक की हर सर्विंग की जगह पानी या शकररहित चाय या कॉफी का सेवन करें तो डायबिटीज़ का खतरा कम हो सकता है।
एक नये अध्ययन में पता चला है कि बच्चे में मोटापे का खतरा सिर्फ इस बात से दूर नहीं हो जाता कि वह क्या खा रहा है बल्कि यह भी कि वह कैसे खा रहा है।
एक ताज़ा अध्ययन में पाया गया है कि देर दोपहर या शाम को स्नैक के रूप में सोया फूड जैसे हाई प्रोटीन खाद्य पदार्थों के सेवन से अनहेल्दी खाने में कमी आती है और मोटापे की समस्या से बचा जा सकता है।
मिसकैरेज की शिकार महिलाएं शर्म और दोषी महसूस करती हैं। सर्वोत्तम शोध के अनुसार, महिलाओं को इसके लिए खुद को दोषी नहीं समझना चाहिए। मिसकैरेज के अधिकतर मामलों में ऐसा कुछ नहीं होता जिसे महिलाएं रोक सकें।
बेडटाइम रूटीन और सोने से पहले कुछ खुशनुमा और शांत गतिविधियों द्वारा आप अपने बच्चे को सुखद और भरपूर नींद दे सकते हैं।
अगर जीवन की शुरुआत में ही दांतों से संबंधित अच्छी आदतें डाल दी जाएं तो बच्चे जीवन भर उनका पालन करते हैं।
भूख लगने पर हम ज़्यादातर जंक फूड जैसे खाद्य पदार्थों की शॉपिंग कर जाते हैं। लेकिन इसके उलट एक तथ्य पता चला है।
बच्चों द्वारा हेल्दी भोजन चुे जाने के उपाय खोजने के लिए हुए अध्ययन में देखा गया कि एक स्माइली चेहरा अगर हेल्दी भोजन के पैकेट पर चस्पा किया जाये तो नाटकीय बदलाव आ सकता है।
स्वास्थ्य के लिए सही विकल्प चुनने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि खाद्य पदार्थ खरीदें तो उस डिब्बे के लेबल पर पोषण के ब्यौरे को समझें।
भारत में जो मांएं शिशु को स्तनपान कराने में असमर्थ हैं वे अब मिल्क बैंक की सहायता ले सकती हैं।
सेक्स शिक्षा का अर्थ केवल यह समझाना नहीं है कि यौन संबंध कैसे बनाये जाते हैं बल्कि इससे यौन शोषण, संक्रमण और अनचाहे गर्भ से सुरक्षा का रास्ता भी खुलता है।
मछली में पाये जाने वाले फैटी एसिड की कमी के कारण भ्रण के विकास के दौरान और शिशु के जन्म की शुरुआत में भी मस्तिष्क का विकास बाधित होता है।
कुपोषण से निपटने के लिए ज़िला स्तर पर डेटा की ज़रूरत है। राज्य स्तर पर बना डेटा यह नहीं दर्शाता कि राज्य में किस क्षेत्र पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
यह जानकर हैरान न हों कि डॉक्टरों का सुझाव है कि माताएं बीमार होने पर भी शिशु को स्तनपान करा सकती हैं।
जो बच्चे मृत्यु, तलाक या त्रासदी के कारण मनोवैज्ञानिक तनाव झेलते हैं, उनमें बचपन में डायबिटीज़ होने की आशंका तीन गुना ज़्यादा होती है।
भारत में खाद्य सुरक्षा न होने की समस्या का गंभीर उदाहरण है 2013 में हुई 22 स्कूली बच्चों की मौत जैसे अफसोसनाक मामले।
जहां कुछ लोग अपने बच्चों के लिए बेहद सफाई का खयाल रखते हैं वहीं कुछ लोग इस पर […]
यह उत्पीड़न का प्रचलित माध्यम बन गया है क्योंकि सोशल मीडिया और अन्य तकनीकी उपकरणों जैसे मोबाइल फोन और लैपटॉप आदि के ज़रिये कई बार सूचनाओं पर नियंत्रण और नज़र रख पाना संभव नहीं होता।