बड़े बच्चे छोटे सहोदरों के पालन में करते हैं मदद


Photo: World Bank / Curt Carnemark

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शुरुआती मनुष्य कब अस्तित्व की कठिनाइयों के संघर्ष में सक्षम हुआ, इस बारे में एंथ्रोपोलॉजिस्ट लंबे समय से मानते रहे हैं कि यह सामूहिक सहयोग के सिद्धांत पर आधारित रहा होगा। हालांकि एक नये शोध में इस विश्वास को चुनौती दी गई है।

मानव के विकास की शुरुआत में, बच्चों की देखभाल के तरीके अलग अलग चरणों से गुज़रे। पहले मांएं एक समय में अपने एक ही बच्चे के विकास के लिए सारे प्रयास किया करती थ्ज्ञीं जैसे अब भी बंदरों में देखा जाता है। किसी समय में इसमें बदलाव आया, और हमारे मानव पूर्वजों में आपसी सहयोग की भावना बढ़ी तो एक मां के बच्चों की देखभाल दूसरी महिलाएं भी करने लगीं। चली आ रही मान्यता के हिसाब से यह बदलाव अचानक हो गया लेकिन एक नये अध्ययन में माना गया है कि इस बदलाव के बीच कुछ और भी हुआ। संभवतः एक मां के बड़े बच्चों ने छोटे बच्चों के विकास में सहयोग देना शुरू किया और यह आज भी देखा जाता है।

इस अवधारणा को साबित करने के लिए कोई अवशेष रिकॉर्ड तो नहीं है लेकिन यूएस में उटाह यूनिवर्सिटि के एंथ्रोपोलॉजिस्ट केरेन क्रेमर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए एक कंप्यूटर मॉडल बनाया और उसमें यह समस्या स्थापित की। उन्होंने अध्ययन की शुरुआत करते हुए यह विचार किया कि पहले एक मादा अपने एक बच्चे को 5-6 साल तक विकसित करती है और फिर पैमाने बदले और वर्तमान समय के हिसाब से, एक मॉडल बनाया जो 2-3 साल के बच्चे के विकास और एक समय में कई बच्चे होने से संबंधित था।

क्रेमर बताते हैं कि “हमने आर्थिक समस्या का एक नमूना बनाया जो मानव विकास के दौरान सामने आया होगा। जग मांएं अधिक बच्चे पैदा करने में सक्षम हुई होंगी तब उन्हें उन बच्चों की देखभाल के लिए अपने अलावा किसी और की ज़रूरत भी पड़ी होगी।’’ क्रेमर कहते हैं कि ‘‘मनुष्यों में माएं दिलचस्प हैं। वे कई प्रजातियों की मांओं से अलग भी हैं क्योंकि वे शुरुआत में अपने बच्चों को पोषित करती हैं और फिर क्रमबद्ध तरीके से दूसरे लोग उनके बच्चों को पालने में मदद करते हैं।”

सबसे पहले, मॉडल ने अनुमान लगाया कि अगर मांओं के एक-दो बच्चे बड़े हैं और एक बच्चा छोटा है तो मांओं को उसे पालने के लिए दूसरे वयस्कों पर आश्रित नहीं होना पड़ता। जैसे-जैसे प्रजनन बढ़ता है और बच्चों के अस्तित्व का खतरा कम हो जाता है, एक मादा के अगल-अगल उम्र के 5-7 बच्चे होते हैं तब उसे अतिरिक्त मदद की ज़रूरत होती है।

क्रमेर ने कहा कि “ऐसा लगता है कि पहले मनुष्य परिवारों में मांओं और बच्चों के आपसी सहयोग की रचना हुई होगी।”

क्या छूट गया है और किस बारे में और अध्ययन की ज़रूरत है? वह यह कि बड़े बच्चे अपने छोटे सहोदरों को पालने में मदद की भावना क्यों रखते हैं। क्रेमर का कहना है कि इस बारे में ज़्यादा शोध नहीं हुए हैं क्योंकि अब तक एंथ्रोपोलॉजिस्ट सहोदरों की मदद को महत्वपूर्ण नहीं समझ सके हैं।

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