व्यस्त पिताओं के लिए कुछ सुझाव


Photo: Avava | Dreamstime.com

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अक्सर घरों में माताएं ही बच्चों के साथ ज्त्रयादा वक्त बिताती हैं चाहे वह भोजन को लेकर हो, स्नान को लेकर, होमवर्क कराने या सोते समय कहानी सुनाने को लेकर हो। यह तब भी होता है जब दोनों अभिभावक वर्किंग हों। यह हालांकि हमेशा मज़ेदार नहीं होता फिर भी ये कर्तव्य माताओं के ही हिस्से में आते हैं जबकि पिता अक्सर बिना किसी खास वजह के दरकिनार हो जाते हैं या उन्हें सही मौका नहीं मिल पाता।

कई व्यस्त पिता चाहते तो हैं कि वे बच्चों के साथ ज़्यादा वक्त गुजारें और ऐसा करने से न सिर्फ वे बच्चों को बेहतर समझ सकते हैं और मस्ती कर सकते हैं बकि वे मांओं का बोझ भी हल्का कर सकते हैं और इससे बच्चे को भी दोनों अभिभावकों का बराबर रुझान अनुभव होता है। अगर आप बच्चों के साथ ज़्यादा जुड़ने के कुछ सुझाव ढूंढ रहे हैं तो यहां कुछ सुझाव हैं, उन बातों से जुड़े हुए जो आप जानते भी हैं और जो बहुत समय भी नहीं लेतीं।

उदाहरण के लिए, पिता बनने के समय तक अधिकतर पुरुष वित्तीय प्रबंधन में व्यस्त हो चुके होते हैं। ऐसे में बच्चों के खर्चे का हिसाब मां के स्थान पर पिता रख सकते हैं और बच्चों को एक तय रकम देते हुए उन्हें खर्च और बचत के तरीकों के बारे में समझा सकते हैं। (अलाउंस क्यों एक अच्छा आइडिया है, जानने के लिए पढ़ें) पिता बच्चों को ये भी सिखा सकते हैं कि किसी चीज़ के प्रति कैसे काम किया जाता है और त्वरित इच्छाओं को काबू में कर बेतरतीब खर्च को कैसे अनुशासन में रखा जा सकता है।

पिता बच्चों को गेंद फेंने, मारने, किक और कैच करने के साथ ही साइकिल या बाइक चलाना भी सिखा सकते हैं। याद रखें कि यह वक्त साथ में बिताने का एक ज़रिया है न कि बच्चे को सचिन तेंदुलकर या किसी खेल में चैंपियन बनाने का काम। इसी तरह आप अपने बच्चे के किसी प्रोजेक्ट या कार्डबोर्ड से कुछ कलाकृति बनाने में भी जुड़ सकते हैं। अगर आपका ऐसा कोई शौक भी है तो बच्चे के साथ अंतर्संबंध स्थापित करने का यह उपयुक्त माध्यम है।

अगर पिता अक्सर बाहर रहते हैं और बच्चों के साथ ज़्यादा समय न बिता पाने की वजह यही है तो अपने शेड्यूल में थोड़ा समय अपनी पत्नी के साथ बात करने के लिए निकालें। इस समय में मां बच्चों के जीवन के बारे में सारा विवरण दे सकती हैं। अक्सर ऐसा होता है कि व्यस्त अभिभावक अपने बच्चों के जीवन की महत्वपूर्ण सूचनाओं से अनभिज्ञ रहते हैं जैसे उनकी स्कूली प्रगति, भावनात्मक और मानसिक अवस्था और सामाजिक गतिविधियां आदि क्योंकि वे अपने बच्चों से अंतरंग संवाद स्थापित नहीं कर पाते। अगर ये सूचनाएं मिलती रहें तो पिता बच्चों के बारे में कई बातें जान सकते हैं मसलन अगर बच्चे को कोई परेशानी है तो वे ज़्यादा समय निकालकर सक्रिय रूप से उसे सुलझाने में मदद कर सकते हैं।

इसी तरह से, अपने बच्चों के साथ समय निकालें तो क्वालिटि समय बिताने की कोशिश करें। भले ही महीने में एक बार हो, लेकिन एक-दूसरे के साथ क्वालिटि समय बिताने से रिश्ता गहरा होता है औश्र बच्चे के मन पर इस समय का प्रभाव देर तक रहता है।

इस तरह के कुछ छोटे प्रयासों से पिता अपने बच्चों के साथ ज़्यादा जुड़ सकते हैं लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो आपको एक गहरे रिश्ते के लिए करना होगा ताकि बच्चा आपसे जुड़ाव महसूस करता रहे और खुद को सुरक्षित व समर्थ महसूस करे।

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