गूगल करें ‘‘किड्स इनफरमेशन ऑनलाइन’’


अगर आप छपा हुआ कोई कागज़ नहीं पढ़ रहे हैं तो आप उनमें से एक हैं जिनके पास उंगलियों पर ही चकित करन देने वाला सूचनाओं का संसार है। इंटरनेट की वजह से समाचार, सूचनाएं, वीडियोज़, समीक्षाएं, सलाह और मनोरंजन सभी कुछ सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर संभव हो सका है। कई बार वयस्कों को भी यह दुविधा हो जाती है कि ऑनलाइन मिने वाली सभी सूचनाएं विश्वसनीय नहीं हैं। इसका हमारे बच्चों के लिए क्या अर्थ हो सकता है? वह कैसे जानेंगे कि क्या सही है, क्या पक्षपातपूर्ण है और क्या एकदम गलत सूचना है?

मनोचिकित्सक और लेखक लिंडा पर्लमैन गॉर्डन ने न्यूज़ओके को बताया कि “वयस्कों तक को यह समझने में परेशानी होती है कि ऑनलाइन कौन सी सूचना सही है और कौन सी नहीं। इंटरनेट से बच्चों का प्राप्त बहुत सी सूचनाएं जांची-परखी हुई नहीं होतीं। अभिभावक होने के नाते हमारी ज़िम्मेदाी है कि हम सुनिश्चित करें कि बच्चों क्या सही जान रहे हैं औश्र क्या नहीं।”

स्कूल जाने वाले कई बच्चे क्लास प्रोजेक्ट की तैयारी करने के लिए सूचनाओं और तस्वीरों के माध्यम से इंटरनेट पर खोजना सीख रहे हैं। ऐसे में जब डेटा का एक बड़ा संसार इंटरनेट पर है तब आप यह नहीं मान सकते कि बच्चे वहां केवल विज्ञान और भूगोल से ही रूबरू हो रहे हैं। धर्म, यौनाचार, राजनीति और स्वास्थ्य जैसे विषयों को लेकर भी बच्चे भी चकित होते हैं। हालांकि यहां हम नॉर्नोग्राफी या हिंसा जैसे अत्यधिक खतरनाक विषयों की बात नहीं कर रहे हैं लेकिन इंटरनेट पर पहले बताया गये विषयों के बारे में भी ध्यान देने की ज़रूरत है और इस बारे में कॉंटेंट कंट्रोल औश्र इंटरनेट फिल्टर की मदद से कुछ सीमाएं बांधी जा सकती हैं।

कॉंटेंट फिल्टर बुरी या गलत सूचनाओं या विचारों को ब्लॉक नहीं करते। वयस्कों की तरह ही बच्चों से भी ऑनलाइन मिलने वाली सूचनाओं को लेकर कुछ सवालात करने चाहिए। हालांकि उनके उत्तर के लिए आपको भी मदद करना होगी।

कुछ आसान से सवाल ये हैं:

  • साइट के पीछे क्या या कौन है ?
  • इस सूचना के पीछे उनका क्या मकसद है?
  • अमुक सूचना के पीछे क्या सबूत या पुष्ट आधिकारिकता है?
  • सूचना कितनी अपडेट है?

कुछ और बातें भी आपको ध्यान रखना चाहिए:

  • अगर आपका बच्चा कंप्यूटर पर इंटरनेट एक्सेस करता है तो घर के बीच में उसकी जगह बनाएं ताकि आप नज़र रख सकें। अगर मोबाइल पर करे तो बच्चे को आप अपने साथ ही कमरे में बैठने को कहें।
  • अगर आप कुछ साइट्स को विश्वसनीय समझते हैं तो बच्चों के साथ शेयर करें और उन्हें बताएं कि वह विश्वसनीय क्यों हैं।
  • बच्चे जब टीनेज में पहुंचते हैं तब वे अपनी प्राइवेसी चाहते हैं, लेकिन उससे पहले तक यही बेहतर है कि कंप्यूटर पर कार्य करते समय आप बच्चे के साथ बने रहें।

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