दोस्त बनाने में करें बच्चे की मदद


Photo: Shailesh Nanal | Dreamstime.com

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किसी और घर में शिफ्ट होने या स्कूल बदलने के कारण बच्चे के दोस्त छूट जाते हैं और उसे नये दोस्त बनाने की शुरुआत करनी होती है। यह किसी भी उम्र के बच्चे के लिए हताशा भरा हो सकता है और इसमें उसे अभिभावकों के सहयोग की ज़रूरत होती है। दोस्त बनाने के इस प्रयास में अभिभावक बच्चे की मदद करने के लिए यहां दिये जा रहे कुछ उपाय अपना सकते हैं।

अपने बच्चे को सामाजिक बनाने के लिए सबसे पहला तरीका है उसके सामने अच्छा उदाहरण पेश करना। जब वह आपकों दूसरों के साथ अच्छे ढंग से सम्मानजनक और उदार व्यवहार करते देखेगा तो वह भी वैसा ही करेगा जिससे दूसरे बच्चे उसके प्रति आकर्षित होंगे।

अगर आपका बच्चा नये और अपरिचित वातावरण में है तो उसकी मदद करने के लिए आप सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लें और दोस्ताना माहौल बनाएं। एक और अच्छा तरीका यह है कि आप अपने बच्चे की कक्षा में पढ़ने वाले अन्य छात्रों के अभिभावकों के साथ मिले-जुलें और उन्हें जानें। साथ ही, उनके और उनके बच्चों के साथ अपने बच्चे को हिलने-मिलने का मौका देने के लिए प्ले डेट्स संयोजित करें।

गतिविधि साझा करने से बच्चे आपस में जुड़ते हैं, इसलिए खेल के मैदान आदि आउटडोर गतिविधियों में समय देने से दूसरे बच्चों के सज्ञथ आपका बच्चा आसानी से जुड़ सकता है। ऐसे में बच्चे अपना खेल का सामान साझा करना, बातचीत करना औश्र अपनी उम्र के बच्चों पर गौर करना सीखते हैं। ध्यान दें कि आपका बच्चा कॉलोनी या पड़ोस में फुटबॉल या जंप रोप जैसे खेलों में हिस्सा ले। अगर ज़रूरत हो तो आप खुद एक या दो बार जाकर दूसरे बच्चों से उसका परिचय कराएं। डांस या तैराकी जैसी सामूहिक गतिविधियों में अपने बच्चों को दाखिला दिलवाना भी एक तरीका है जिससे बच्चा दूसरे बच्चों के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित महसूस करता है। पर्याप्त शारीरिक गतिवधियों से आपके बच्चे का मूड और स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है।

एक तरीका यह है कि कभी-कभी अपने बच्चे को उसके दोस्तों को घर बुलाने की इजाज़त दें और उन्हें घर पर पार्टी, र्बोउ गेम्स, फिल्म या रात में साथ में सोने का मौका दें। किसी एक गतिविधि पर फोकस रखें और बच्चों के पसंदीदा स्नैक्स आदि बनाकर दें और उन्हें साथ में समय बिताने दें। इससे उन्हें सामाजिकता के दबाव में आने की ज़रूरत नहीं होती और वे खुलकर आपस में बातचीत कर पाते हैं और एक-दूसरे के साथ जुड़ते हैं।

अंततः यह याद रखें कि हो सकता है कि आपका बच्चा आपके जितना दोस्ताना और सामाजिक न हो इसलिए यह ज़रूरी है कि आप उसकी वैयक्तिकता को समझें और बिना वजह उसे उसे हर किसी के साथ दोस्ती करने पर मजबूर न करें। कुछ बच्चे बहुत सारे दोस्त बनाना चाहते हैं लेकिन कुछ बच्चे थोड़े ही दोस्तों के साथ खुश रह सकते हैं। अंतर्मुखी बच्चे ज़्यादातर दोस्ती करने में बहुत समय लेते हैं। तो ज़्यादा चिंता न करें और अपने बच्चे के किसी भी सामाजिक व्यवहार को उचित पाएं तो उसकी तारीफ करें, प्रोत्साहन दें।

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