बच्चों के लिए कैसे निकालें समय


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अपने काम और बच्चे के लिए समय के निकालने के बीच में संतुलन बनाना कई वर्किंग पेरेंट्स के लिए चुनौती होता है। लंबी दूरियां और देर रात तक काम करने के समय के कारण जो अभिभावक अपने बच्चे से कम मिल पाते हैं, वे बच्चे को समय न दे पाने के लिए खुद को दोषी महसूस करते हैं। यह भी चिंता का विषय होता है कि बच्चा जिसकी देखरेख में रहता है, वह उससे ज्त्रयादा जुड़ाव महसूस करता है। बच्चे का यह जुड़ाव प्राकृतिक है लेकिन अभिभावक के लिए यह परेशानी का कारण होता है।

जब आप दफ्तर से घर पहुंचते हैं तो ज़्यादा से ज्त्रयादा वक्त बच्चे के साथ गुज़ारना चाहते हैं लेकिन यह भी ज़ाहिर है कि शाम के बाद बच्चे का उत्साह भी फीका पड़ चुका होता है और वह भी थकान आदि महसूस कर रहा होता है। लेकिन, स्थिति इतनी खराब नहीं है क्योंकि अध्ययनों में पता चला है कि काबिले-गौर यह है कि आप बच्चे के साथ समय कैसे बिताते हैं बजाय इसके कि कितना। और कुछ ही देर बच्चे के साथ समय इस तरह बिताने के तरीके हैं कि वह बच्चों के मन में बस जाये।

उदाहरण के लिए, जब आप घर पहुंचते हैं और घर के काम व डिनर आदि निपटाने की जल्दी में होते हैं तो अपने बच्चे को अपने कामों में जोड़ें और उनकी मदद लें। साथ ही उनकी मदद के लिए उन्हें धन्यवाद भी दें। इन कामों के साथ साथ अपने बच्चे से बातचीत करते रहें और उसे कुछ सिखाने की कोशिश भी। कपड़े धोने जैसे कामों के बीच आप उससे उसकी गतिविधियों और उसके मन की बातें जान सकते हैं।

हो सकता है कि काम के कारण हफ्ते भर आप ठीक से बच्चे के लिए समय न निकाल सकें लेकिन वीकेंड पर आप उसे स्पेशल महसूस करा सकते हैं और उसके साथ जुड़ सकते हैं। बच्चों को बाहर घूमने जाना पसंद होता है जैसे किसी मॉल में या ऐतिहासिक जगह पर या फैमिली के साथ पिकनिक पर जाना आपको उसके साथ ढेरों बातें करने का मौका दे सकता है। बाहर साथ में खाना खाने के दौरान आप यह जता सकते हैं कि आप उसके बारे में सोचते हैं और उसका ध्यान रखते हैं।

और भी तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे पर ध्यान देना ज़ाहिर कर सकते हैं। संभव हो तो, अपने बच्चे के स्कूल इवेंट्स में शामिल होने की कोशिश करें। पेरेंट-टीचर मीटिंग में जाएं जिससे आपको यह पता चल सके कि आपका बच्चा क्या प्रगति कर रहा है और वह दूसरों के साथ और दूसरे उसके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।

जब आप बच्चे के लिए समय निकालें, तो ध्यान रखें कि ज़्यादा समय न दे पाने का आपका दोषी भाव बच्चे को महसूस न हो। अगर आपका बच्चा ज़्यादा या नाजायज़ चीज़ों की मांग करता है तो पूछें कि क्यों चाहिए और मना करने में कतई संकोच न करें। इससे वह आपके फैसलों का सम्मान करना भी सीखेगा और अपनी ज़रूरतों को संतुलित या मांगों का जायज़ करना भी।

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