मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) के बारे में सब कुछ जानना आपके लिए जरूरी है


मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) के बारे में सब कुछ जानना आपके लिए जरूरी है

Headache on blue x-ray


रीड और मस्तिष्क को चारों और से घेरने वाली झिल्ली में आई सूजन को मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग कहते हैं । यह रोग विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया अथवा वायरस के संक्रमण से हो जाता है । वायरल मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर),बैक्टीरियल मैनीजाइटिस से कहींं अधिक आम है,जो कि बहुत ही गम्भीर रोग है और यदि उपचार न किया जाए तो प्राण घातक भी हो सकता है । जिन कारणों से मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) होता है वे अक्सर अन्य प्रकार के रोगों से जुडे होते हैं, जैसे त्वचा, मूत्रीय,और जीआई सिस्टम अथवा श्वास नलिका संक्रमण । कान अथवा नासिका साइनस का अत्याधिक संक्रमण रीड के द्रव्य और मस्तिष्क में फैल कर मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग लगा सकता है ।

वायरल व बैक्टीरियल मैनीजाइटिस तब फैलता है जब कोई असंक्रमित व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति की द्रव्य बूंदों के संपर्क में आता है । आमतौर पर यह बूंदे खांसने अथवा छींकने से फैल जाती हैं। आमतौर पर संक्रमण उन लोगों में ज्यादा फैलता है जो आस पास रहते हैं और नियमित रूप पर एक दूसरे के संपर्क में आते हैं जैसे सहयोगी,क्लासमेट अथवा हाउसमेट जो बंद स्थानों में रहते हैं । आमतौर पर सहयोगी अथवा क्लासमेट के थोडा बहुत संपर्क में आने से संक्रमित कीटाणु मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग को फैलाने के लिये काफी नही होते ।

लक्ष्ण

मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) के लक्ष्ण एक से दूसरे रोगी में भिन्न होते हैं जो रोगी की उम्र और मूल संक्रमण के कारणों पर निर्भर करता है । प्राथमिक लक्ष्ण बडी तेजी से धावा बोलते हैं और व्यक्ति को अक्सर जुकाम हो जाता है और रोगी को दस्त/उल्टी होने लगती है अथवा संक्रमण के अन्य लक्ष्ण भी दिखाई देने लगते हैं । बैक्टीरियल मैनीजाइटिस के आम लक्ष्णों में गर्द्न मेंं अकडन, स्थायी सर दर्द, बुखार, सुस्ती, रोशनी के प्रति संवेदशीलता और त्वचा में चकत्ते आदि शामिल है । यदि उपचार न किया जाए तो मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) से दौरे, दिमागी खराबी और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है ।

वायरल मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग में बुखार, सर दर्द और अन्य फलू जैसे लक्ष्ण दिखाई देते हैं । वायरल मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) इतना हल्का होता है कि अक्सर इसकी पहचान नहीं हो पाती और 7 से 10 दिन के अंदर पुरी तरह आराम व रोग कम करने वाले उपचार से यह अपने आप ठीक हो जाता है ।

उपचार

बैक्टीरियल मैनीजाइटिस बहुत ही गम्भीर रोग है इसका तुरंत उपचार किया जाना चाहिए ताकि परेशानी से बचा जा सके । यदि बच्चे को किसी प्रकार का मैनीजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) रोग हो जाए तो उसे तुरंत डॉक्टर अथवा अस्पताल के आपतकालीन कक्ष में ले जाना जोखिम भरा हो सकता है । इलाज करने वाला डॉक्टर यह निश्चित करने के लिए कि बच्चे को वायरस या बैक्टीरिया के कारण संक्रमण तो नही है,वह रीड से द्रव्य लेने के लिए उसकी रीड में सुराख करेगा । यदि रोगी को वायरल मैनीजाइटिस हो तो उसे अस्पताल में भर्ती कराएं जबकि यदि रोगी बहुत ज्यादा बिमार न हो तो औसतन घरेलू इलाज से भी काफी आराम मिल सकता है । यदि बैक्टीरियल मैनीजाइटिस का संदेह हो तो संक्रमण को रोकने के लिए रोगी को अस्पताल में भर्ती कराएं, उसे औरों से अलग रखें और एंटीबॉयोटिक दवाएं दें ।

रोकथाम

बहुत सी बिमारियां जिनके कारण मैनीजाइटिस रोग हो सकता है, उनके लिए सामान्य प्रतिरक्षा टीकाकरण कराना इस रोग से बचने का एकमात्र बेहतर तरीका है । Haemophilus influenzae type b (Hib), meningococcus और pneumococcus बच्चों और बडों को मैनीजाइटिस रोग से बचा सकते हैं । बच्चों को मैंनीगोकोक्कल (meningococcal) रोग से बचाने के लिए 11 वर्ष की आयु होने पर पांच साल बाद निरंतरता बनाए रखने के लिए वर्धक टीका लगवाएं । जिन युवाओं और ब्च्चों का कभी भी टीकाकरण न हुआ हो या वर्धक टीका न लगा हो तो उन्हें भी प्रतिरक्षा टीका लगावाया जाना चाहिए । विशेष रूप से तब यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब उन्हें कालेज या बोर्डिंग स्कूल, मिल्ट्री अथवा कैम्प जैसे स्थानों में दूसरे लोगों के नजदीकी संपर्क में रहना पडे ।

मैनीजाइटिस रोग जिस प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस से फैलता है वह आम होते हैं जो दूसरों को आसानी से संक्रामित कर देते हैं, उनमें से बहुत से द्वार नॉब और काउंटर टॉप पर जीव्य रह जाते हैं । इसके लिए अच्छी साफ-सफाई एक अन्य महत्वपूर्ण साधन है । हाथों को अच्छी तरह से धोना, विशेषकरशौचालय जाने के बादऔर खाना खाने से पहले । बर्तन, भोजन एवं पेय आदि को सांझा न करें ताकि संक्रमण फैलाने वाले किटाणुओं से बचा जा सके और जहां तक संभव हो बिमार लोगों से दूर रहें । दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए संक्रमित लोग घर पर रह कर आराम करें, काम या स्कूल न जाएं । जो लोग कभी-कभार संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाएं तो उन्हें रोगनिरोधी उपायों के रूप में एंटीबॉयोटिक दवाएं ले लेनीचाहिए।

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