आत्मरक्षा कार्यक्रम से महिलाएं किस प्रकार बलात्कार से अपना बचाव कर सकती हैं ।


आत्मरक्षा कार्यक्रम से महिलाएं किस प्रकार बलात्कार से अपना बचाव कर सकती हैं ।
एक नए अनुसंधान से यह ज्ञात हुआ है कि आत्मरक्षा एवं बलात्कार रोधक कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाएं अपनी रक्षा कर पाने में काफी हद तक समर्थ बन जाती हैं तथा इस कारण सबल हो जाने से उनके प्रति होने वाले इस प्रकार के अत्याचार संबंधी मामले भी घटकर आधे रह गए हैं ।

कनाडा में अनुसंधानकर्ताओं के एक समूह ने हाल ही में बलात्कार तथा हिंसा की घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए उनमें कमी लाने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम के तहत महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने का निश्चय किया ।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन्स  वेबसाइट (National Library of Medicine website) में प्रकाशित एक लेख से  प्रशिक्षण कार्यक्रम के पश्चात अत्याचार के मामलों में अत्याधिक कमी की जानकारी प्राप्त होने पर अनुसंधानकर्ता आश्चर्यचकित रह गए । इस अध्ययन के लेखक चाजलिन सेन्न,  जो यूनिवर्सिटी ऑफ विन्डसर, ऑनटेरियो, कनाडा में मनोविज्ञान के प्रोफेसर हैं  ने यह कहा कि “हमने तो यह आशा की थी कि महिलाओं को दी जाने वाली जानकारी एवं उन्हें अपनी  रक्षा के प्रति समर्थ बनाने से उनके प्रति होने वाले मात्र सैक्सुअल अत्याचारों के प्रभाव ही कम होगें । फिर भी हमें ऐसे अत्याचारों में इतनी अधिक कमी आने की  उम्मीद बिल्कुल नहीं थी । किसी एक बलात्कार को रोकने के कार्यक्रम के अंतर्गत केवल 22 युवा महिलाओं को  प्रशिक्षण दिया जाना अपेक्षित है । ”

इस अध्ययन में कनाडा के तीन विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए अनुसंधान भी शामिल किए गए हैं । इनमें 17 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की प्रथम वर्ष की 893 विद्यार्थी महिलाओं ने भाग लिया था । बिना किसी तरतीब के महिलाओं को दो समूहों में विभाजित किया गया था । एक समूह को केवल सैक्सुअल अत्याचार से संबंधित साहित्य पढ़ने के लिए दिया गया था जबकि दूसरे समूह के लिए बलात्कार से बचाव कार्यक्रम के तहत 12 घंटों के चार सत्र आयोजित किए गए थे ।  इस कार्यक्रम में महिलाओं को अपनी पहचान वाले पुरूषों द्वारा किए जाने वाले सैक्सुअल अत्याचार के जोखिम से बचने के उपायों की जानकारी दी गई । इससे वे लाचार स्थितियों की पहचान कर पाने में समर्थ बन गई और उन्हें अपने प्रति होने वाले सैक्सुअल अत्‍याचार का सामना कर पाने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया था । महिलाओं को सेक्स के बारे में सही व सकारात्मक नजरिए से चर्चा करने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया था ।

इस कार्यक्रम के प्रति टिप्पणी करते हुए श्री सेन्न ने यह कहा कि “ सामाजिक स्थितियों अथवा अपनी जान पह्चान  वाले पुरूषों से होने वाले खतरे की पहचान करने में अनेकों बाधाएं होती हैं ।  महिलाओं को ऐसे लोगों की पहचान कर पाने में सक्षम बनाने तथा उसके लिए अपेक्षित अभ्यास करवाने से मकसद यह कार्यक्रम तैयार किया गया है जिससे वे खतरनाक स्थि‍तियों का तेजीसे आभास  करके या तो उससे बाहर निकल पाएं  या फिर उनका सामना अपनी पूरी ताकत के साथ कर सकें ” ।

प्रशिक्षण दिए जाने के एक वर्ष पश्चात सभी प्रतिभागी महिलाओं ने सर्वेक्षण में भाग लिया । उसमें यह पाया गया कि जिन महिलाओं को बचाव कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया गया था उनमें से 5% से थोडी अधिक महिलाओं के साथ वर्ष के दौरान बलात्कार की घटना घटित हुई । जबकि दूसरे समूह की महिलाओं में बलात्कार की घटनाओं का आंकड़ा 10% था । प्रशिक्षण प्राप्त समूह में बलात्कार के प्रयास की घटनाएं 3% थी जबकि दूसरे समूह में ऐसी घटनाएं 9% हुई ।

सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं के प्रति अत्याचार के मामलों में कमी आने के बावजूद भी कुछ विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस व्यवस्था में बलात्कार के संभावित शिकार पर बहुत ही ज्यादा जिम्मेदारी लाद दी जाती हैं जबकि इसका बोझ बलात्कारियों पर अधिक लादा जाना चाहिए ।

यू.एस. सेन्ट फॉर डिजीज कन्ट्रोल एंड प्रिवेंशन ( U.S. Centers for Disease Control and Prevention) की हिंसा अवरोधक डिवीजन की प्रमुख व्यवहार वैज्ञानिक कैथलीन बासिल का यह कहना है कि “समस्या की जड़ यह है कि बचाव के प्रयास सैक्सुअल अत्याचार के संभावित शिकार को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं जिससे ऐसे अत्याचारों से अपना बचाव करने का पूरा जिम्मा उन्हीं पर आ जाता है जबकि संभावित बलात्कारियों तथा समाज द्वारा इस संबंध में निभाई जा रही भूमिका की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं जाता ।” सैक्सुअल अत्याचार के लिए पीडि़त महिला किसी भी दृष्टि से दोषी नहीं होती ।

सेन्न ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है कि कुछ हाई स्कूल कार्यक्रमों में पुरूषों को ध्‍यान में रखकर तैयार किए गए कार्यक्रमों के प्रभाव सकारात्मक पाए गए हैं । उन्होंने यह कहते हुए अपने कथन का समापन किया कि “हमें प्रत्येक प्रकार के व्यवहार में सैक्सुअल हिंसा समाप्त करने के प्रयास करते रह्ना चाहिए ।  सैक्सुअल अत्याचार करने वाले पुरूषों को इसके लिए उत्तरदायी बनाएं तथा पीडि़तों की सहायता करें और महिलाओं को ऐसे अत्याचार का सामना कर सकने के प्रति अवश्य समर्थ बनाएं ।

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