घर में होने वाली दुर्घटनाओं से बच्चों को लगने वाली चोटों से बचने के उपाय ।


Tips to prevent children from accidents at home

Photo: Imagesbazaar

टक्कर तथा खरोंचें, चोटें एवं नील पड़ जाना बचपन के साथ साथ ही चलता है । ऐसा कोई नहीं है जिसे बचपन में ऐसी किसी प्रकार की घटना से न गुजरना पड़ा हो । 3 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को आपात चिकित्सा उपलब्ध करवाए जाने का प्रमुख कारण घर पर लगने वाली चोट ही होता है तथा घर में लगने वाली ऐसी अनचाही चोटों से मरने वाले 70% बच्चे 4 वर्ष अथवा उससे कम आयु वर्ग  के ही होते हैं ।

वर्ष 2012 में प्रकाशित एक जरनल में बालरोग विशेषज्ञों द्वारा अनुमान दिए गए हैं कि वर्ष 1990 तथा 2010 के दौरान अमेरिकी आपात चिकित्सालयों में घर पर लगने वाली चोटों के कारण लाए गए बच्चों की संख्‍या लगभग 65,000 थी । यूके मिरर के अनुसार अधिकांश अभिभावकों – दो तिहाई – के पास ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए साधन तक उपलब्ध नहीं है । उन्हें यह भी ज्ञात नहीं है कि ऐसी घटना घटित होने की स्थिति में उन्‍हें करना क्या चाहिए । अक्सर होने वाली ऐसी सामान्य दुर्घटनाओं से बचाव के लिए यह जरूरी है कि अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले उपायों की जानकारी आपके पास हो । ऐसे ही कुछ उपाय हम नीचे प्रस्तुत कर रहे हैं :-

नुकसानदायक वस्तुएं निगलने की स्थिति में

अल्कोहल, क्लीनिंग लिक्विड्स (सफाई हेतु द्रव्य रूपी सामग्री) तथा यहां तक पौधों इत्यादि को निगलना खतरनाक हो सकता है । ऐसी किसी स्थिति में सबसे पहले तो आपको यह ज्ञात करना चाहिए कि आखिर निगला क्या गया है और कितना निगला गया है और कब निगला गया है । बच्चे को तत्काल अस्पताल लेकर लाएं और अपने साथ निगला गया सामान अवश्य ले जाएं ।

बच्चे का दम घुटना अथवा सांस लेना

जब बच्चे का दम घुटता है तो वह अपना गला अथवा छाती पकड़ता है तथा वह सांस नहीं ले पाता अथवा बोल नहीं पाता है । सबसे पहले तो आप यह करें कि आप अपनी हथेली की ऐड़ी से बच्चे की पीठ पर से कंधे की हड्डी पर पांच बार धपकियां लगाएं । बच्चे की सांस की नली में यदि कोई रूकावट आई है तो वह ऐसा किए जाने से दूर हो जानी चाहिए ।

जलने से बचाव के लिए

यदि आपके बच्चे को जलने कोई घाव लगता है तो तत्काल उसकी ओर ध्यान दें ताकि उसके घाव का निशान न बना रहे और ही किसी नस को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे । बच्चे को भले ही परेशानी हो तो भी जले हुए स्‍थान को पकड़े और 10 मिनट तक बहते ठंडे पानी के नीचे रखें । इसके पश्चात्‍ जले हुए स्थान को ठंडक दें तथा किसी साफ प्लास्टिक बैग से उसे कवर कर दें । ऐसा करने से प्लास्टिक को चमड़ी से चिपकाए बिना जले हुए स्थान को हवा से बचाया जा सकेगा जिससे नुकसान में बढ़ोतरी नहीं होगी । चिकित्सा उपचार में किसी प्रकार की देरी न करें ।

सिर पर टक्कर लगने पर

शिशुओं और यहां तक कि बच्चों के सिर पर भी अक्सर कभी भी टक्कर लग जाती है । ज्यों-ज्यों बच्चे बड़े होते हैं यह होता ही है । तथापि, कुछ चोटे गम्भीर होती हैं । यदि आपका बच्चा अपने सिर पर कभी कहीं टक्कर खा बैठा है तथा वहां सूजन अथवा दर्द है तो वहां किसी प्रकार से ठंडक दें । आप एक कपड़े में (रूमाल इत्यादि में) बर्फ के क्यूब्स बांधकर प्रयोग में ला सकते हैं परन्तु बर्फ को कभी चमड़ी से छुआएं नहीं । होश खो बैठने अथवा उल्टी होने अथवा ऊंघने के लक्षण आघात जैसे गम्भीर लक्षण होते हैं । अपने बच्चे को तत्काल डाक्टर के पास ले जाएं ।

एलर्जी होने की स्थिति में

यदि आपके बच्चे को किसी प्रकार की एलर्जी हुई है तो उसकी ओर ध्यान दें । किसी प्रकार की एलर्जी देखने में मामूली प्रतीत हो सकती है परन्तु उसके उपचार में देरी काफी घातक हो सकती है । अपने बच्चे को एलर्जी से बचाव के लिए दवा दिए जाने हेतु तत्काल डाक्टर के पास ले जाएं । आपको एलर्जी के कारण का ज्ञान होना चाहिए अथवा यह जानकारी होनी चाहिए कि एलर्जी से  पहले बच्चा क्या और कैसे खेल रहा था और क्या खा रहा था ।

बच्चा अचेत होने पर तथा सांस न लेने की स्थिति में

छोटे बच्चे बहुत नाजुक होते हैं अत: उनके प्रति आपको सचेत रहना चाहिए । सबसे पहले तो यह जांच करें कि क्या बच्चा पीठ के बल लेटने पर सांस ले रहा है तथा उसकी छाती चल रही है । तब उसे चिकित्सा उपलब्ध करवाएं । बचाव के लिए सांस देने के उद्देश्य से बच्चे के सिर को पीछे झुकाएं तथा अपना मुंह उसके मुंह पर लाएं और उसकी नाक को पिंच करें तथा एयरवे में फूंक मारें । छाती पर दबाव के लिए छाती के बीच में केवल दो ऊंगलियों से दबाव दें । ऐसा तब तक करते रहें जब तक चिकित्सा सुविधा आपका उपलब्ध नहीं हो जाती है ।

दुर्घटनाओं से पूर्ण बचाव किसी भी प्रकार से संभव नहीं है परन्तु इनकी बारम्बारता को  कम अवश्य किया जा सकता है । अपने घर को सुरक्षित बनाए रखने के प्रति बड़ों को अधिक ध्यान देना चाहिए जिससे दुर्घटनाओं के कारण बच्चों को लगने वाली चोटों से उनका बचाव किया जा सके । बड़ों को किसी भी प्रकार के संभावित खतरे की ओर ध्यान देना चाहिए और साथ ही बच्चों को सुरक्षा के प्रति समझदार भी बनाना जाना चाहिए । यदि दुर्घटनाएं घटित होती हैं तो अपना आपा न खोते हुए तत्काल मदद के लिए व्यवस्था करें ।

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