प्रतिरोधी तंत्र की मज़बूती के लिए 9 पोषक तत्व


प्रतिरोधी तंत्र की मज़बूती के लिए 9 पोषक तत्वएक स्वस्थ शरीर के प्रतिरोधी तंत्र के मज़बूत होने के कारण कई रोग दूर रह सकते हैं। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिकेशन रिपोर्ट के अनुसार, हैरानी की बात यह है कि संक्रमणों से दूर रखने में बड़े पोषक तत्व नहीं बल्कि सूक्ष्म तत्व और सूक्ष्म पोषण अधिक महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि कुपोषण और कमज़ोर प्रतिरोधी तंत्र के बीच संबंध स्पष्ट नहीं है लेकिन शोध में देखा गया कि पिछड़े इलाकों में रहने वाले कुपोषित लोगों को संक्रमण ज़्यादा होते हैं।
प्रतिरोधी तंत्र की सेहत से हुड़े कुछ पोषक तत्व यहां बताए जा रहे हैं: सेलेनियम: ऐसे शोध हुए हैं जिनमें पता चला है कि सेलेनियम की कमी के कारण ब्लैडर, ब्रेस्ट, कॉलन, रेक्टम, फेफड़ों और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम के लिए क्या सेलेनियम और विटामिन ई के युग्म का असर होगा, इस विषय में एक शोध किया जा रहा है।
विटामिन ए: विटामिन ए की कमी के कारण प्रतिरोध घटता है और संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ता है।
विटामिन बी2: इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि प्रतिरोधी तंत्र को विटामिन बी2 कैसे प्रभावित करता है लेकिन चूहों पर हुए शोध में पता चला है कि यह जीवाणुओं से होने वाले संक्रमण से लड़ने में मददगार है।
विटामिन सी: हालांकि दुनिया भर में इस विटामिन को प्रतिरोधी तंत्र के लिए अपरिहार्य माना गया है लेकिन ऐसा कहने वाले शोधों पर खराब ढंग से संचालित होने के आरोप लगे हैं। माना जाता है कि विटामिन सी के लाभ हैं लेकिन ये तभी होते हैं जब दूसरे सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में इसके साथ लिये जाएं।
विटामिन डी: जब त्वचा धूप के संपर्क में आती है तब शरीर में विटामिन डी पैदा होता है। शोध में पता चला है कि टीबी का कारण माने जाने वाले जीवाणु के विरुद्ध विटामिन डी लड़ता है और प्रतिरोध स्वरूप एंटिमाइक्रोबायल प्रतिक्रिया का कारण बनता है। हालांकि इस विटामिन की दूसरे रोगों के खिलाफ लड़ने की क्षमता पर विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है।
विटामिन ई: विटामिल ई की ज़्यादा मात्रा लेने से वृद्धों में हेपेटाइटिस बी और टिटेनस के खिलाफ एंटिबॉडी प्रतिक्रियाओं में लाभ देखा गया। हालांकि डिपथीरिया और निमोनया संबंधी टीकों के खिलाफ यही परिणााम नहीं देखे गये।
ज़िंक: शरीर में ज़िंक की मात्रा कम होने के कारण प्रतिरोधी कोशिकाओं की क्रियाओं पर असर पड़ता है। ज़िंक एक तत्व है जो संतुलित मात्रा में (15-25 एमजी प्रतिदिन) आवश्क होता है। इसकी ज़्यादा मात्रा लेने से शरीर में हानिकारक असर हो सकते हैं।

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