गर्भ से प्रभावित होती है स्मृति, मस्तिष्क पर पड़ता है स्थायी प्रभाव


Pregnancy affects memory, changes brain permanently

Photo: ImagesBazaar

गर्भ के दौरान हॉर्मोनों के उच्च स्तर का प्रभाव स्मृति पर पड़ता है और एक महिला के मस्तिष्क पर इसका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है। शोध में इंगित किया गया है कि इन हॉर्मोनों के कारण केंद्रीय स्नायु तंत्र के मुख्य भागों की संरचना में परिवर्तन हो सकता है। इन नतीजों से इस विमर्श में मदद मिल सकती है कि क्या रजोनिवृत्त हो चुकीं महिलाओं में हॉर्मोन परिवर्तन थैरेपी से बाद में होने वाले रोग अल्ज़ाइमर के विकास के जोखिम में बदलाव आ सकता है।

अध्ययन में रजोनिवृत्त हो चुकी महिलाओं के लिए सामान्य रूप इलाज में इस्तेमाल होने वाले दो ऑस्ट्रॉन हॉर्मोनों को देखा गया। प्रयोग प्रयोगशाला के चूहों पर किये गये। वैज्ञानिकों का कहना है चूंकि हॉर्मोन और मस्तिष्कीय कोशिकाओं के समान होने के कारण ये नतीजे मनुष्यों पर भी लागू होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन हॉर्मोनों का जटिल प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी उम्र क्या है और क्या वे पहले किसी शिशु को जन्म दे चुकी हैं या नहीं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भ के दौरान ऑस्ट्रॉजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने से मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस कहे जाने वाले हिस्से में नाड़ी कोशिकाओं का पुनर्विकास प्रभावित हो सकता है। हिप्पोकैंपस याददाश्त और जागरूकता के पहलुओं से संबंधित है।

वैंकूवर, कनाडा की यूनिवर्सिटि ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया की लीसा गैलिया ने कहा कि ‘‘हमारे ताज़ा अध्ययन में दिखा कि हॉर्मोन थैरेपी की प्रतिक्रिया में पहले के मातृत्व से संज्ञान और न्यूरोप्लास्टिसिटि में परिवर्तन होता है, यानी कि मातृत्व के कारण मस्तिष्क पर स्थायी असर पड़ता है। गर्भ और मातृत्व जीवन में परिवर्तन लाने वाली घटनाएं हैं जिनका परिणाम महिलाओं की शारीरिकता और मनोवैज्ञानिकता में बदलाव होता है।’’

कैनेडियन एसोसिएशन फॉर न्यूरोसाइंस को उन्होंने बताया कि ‘‘हमारे नतीजे इस बात की वकालत करते हैं कि महिलाओं के मस्तिष्कीय डिसॉर्डर के इलाज के दौरान इन बातों को भी ध्यान में रखा जाये।’’

हिप्पोकैंपस में नाड़ी कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ावा देने वाला ऑस्ट्रॉजन हॉर्मोन का एक प्रकार ऑस्ट्रैडिअल पाया गया। यह नाड़ी कोशिकाओं के लंबे समय तक बने रहने के अवसर बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है।

यंग फीमेल चूहों पर किये गये प्रयोगों में में देखा गया कि ऑस्ट्रैडिअल के लंबे समय तक के क्रॉनिक एक्सपोज़र के कारण उनकी स्मृति में इज़ाफा हुआ। लेकिन जब इन चूहों को एक अलग ऑस्ट्रॉन हॉर्मोन ऑस्ट्रॉन दिया गया, हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला हॉर्मोन, तब स्मृति में इज़ाफा नहीं दिखा।

जब मध्यम आयु के फीमेल चूहों को ऑस्ट्रॉन हॉर्मोन दिया गया, जो पहले शिशु को जन्म दे चुकी थीं, तब देखा गया कि उनमें सीखने और स्मृति संबंधी विसंगतियां थीं। इसी उम्र के उन फीमेल चूहों को जब यह हॉर्मोन दिया गया जो पहले कभी किसी शिशु को जन्म नहीं दे सकी थीं, तब देखा गया कि सीखने व स्मृति संबंधी कई विकास हुए और हिप्पोकैंपस में न्यूरोप्लास्टिसिटि में भी इज़ाफा हुआ। इन नतीजों की सिफारिश है कि गर्भ के कारण मस्तिष्क पर स्थायी असर होता है।

गैलिया ने दि इंडिपेंडेंट को बताया कि ‘‘अगर आप पहले शिशु को जन्म दे चुकी हैं, तो आपकी स्मृति बेहतर होगी लेकिन आपको अल्ज़ाइमर जैसी स्थिति का जोखिम हो सकता है। लेकिन हम बहुत ज़्यादा नहीं जानते कि यह स्थिति क्यों है।’’

जब आप गर्भवती होती हैं तो आपको लगता है कि आपकी स्मृति कमज़ोर हो गयी है लेकिन शिशु को जन्म देने के दो साल बाद ही आपको याददाश्त अच्छी लगने लगती है। गैलिया ने आगे कहा कि इसके बावजूद, उम्र के साथ ही उन महिलाओं की तुलना में जिन्होंने शिशु को जन्म नहीं दिया, शिशु को जन्म दने वाली महिलाओं की स्मृति क्षीण होने लगती है।

उनका निष्कर्ष है कि ‘‘आप जिने ज़्यादा शिशुओं को जन्म देंगी, बाद के जीवन में स्मृति क्षीण होने का खतरा उतना ही ज़्यादा होगा।’’

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