अपने कुत्ते या बिल्ली को नपुंसक कराने के जायज़ कारण


Good reasons to neuter your dog or cat

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पशुओं के शेल्टर अवांछितों से भरे पड़े हैं, जगह और संसाधनों की कमी के कारण स्वस्थ बिल्लियों व कुत्तों का वध किया जाता है। अवांछितों की तादाद न बढ़े, इसकी ज़िम्मेदारी पशु मालिकों और पशुप्रेमियों की है। पशु चिकित्सकों और पशु कल्याण विशेषज्ञों की सलाह है कि अपने पॅट को नपुंसक या बधियाकरण करवाएं। गलियों और शेल्टरों में मरने वाले अवांछितों को बचाने में यह मददगार तरीका है। यह आपके पशु के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

कई रिपोर्ट कहती हैं कि नपुंसक या बधियाकरण करवाए गए पॅट्स, यह न करवाए गए पॅट्स की तुलना में अधिक समय तक जीते हैं। मेल व फीमेल पशुओं के मामले में यह बात समान है। इसकी एक वजह तो यह है कि ऐसा करने से पशुओं के बाहर भटकने और तलाश करने की ज़रूरत कम हो जाती है। इससे उनके दूसरे पशुओं के साथ झगड़े और सड़क हादसे की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

अपने पशु को नपुंसक या बधिया करवाने से उनमें प्रजनन तंत्र संबंधी बीमारियों की आशंका कम हो जाती है जैसे पायरोमेट्रा (यह यूटरिन संक्रमण घातक हो सकता है) फीमेल में यूटरिन कैंसर और मेल में टेस्टिकुलर कैंसर। इसलिए पशु की नपुंसकता पर कुछ पैसे खर्च करने से आपको भविष्य में दस गुना लाभ हो सकता है। (गोल्डन रिट्रीवर के अपवाद के बारे में नीचे पढ़ें) कुछ पशु चिकित्सकों का सुझाव है कि आठ हफ्ते के पॅट को नपुसंक कराना फायदेमंद है जबकि कुछ छह हफ्ते में ही इसका सुझाव देते हैं। यह माना जाता है कि फीमेल पालतू पशुओं को उनके पहले हीट से पहले बधियाकरण करवाना उनकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

स्वास्थ्य संबंधी फायदों के अलावा, ऐसा करने से आपके पॅट के व्यवहार में कई सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। मेल और कुछ फीमेल पशुओं में आदत होती है कि वे अपने मूत्र विसर्जन के ज़रिये अपनी सीमा बनाते हैं। यह बेहद परेशानी वाला हो सकता है अगर आपका पशु आपके घर में इस आदत को पाले। जबकि, नपुंसक किया हुआ कुत्ता इसका आदी नहीं होता। नपुंसक किये हुए कुत्ते ज़्यादा भौंकने और ज़्यादा आक्रामक होने जैसे हावी होने वाले लक्षण कम प्रदर्शित करते हैं।

बिल्लियां भी यूरिन मार्क बनाती हैं। जब आपकी बिल्ली चार महीने की हो तब यह प्रक्रिया कर आप अपने घर में यूरिन मार्किंग जैसी आदतों से बच सकते हैं। इससे पशु शांत होते हैं, उनकी भटकने और झगड़ने की प्रवृत्तियों में आसानी होती है।

गोल्डन रिट्रीवर्स के मामले में नपुंसक किये जाने के स्वास्थ्य संबंधी फायदों में अपवाद देखने को मिल सकता है। यूएस की यूनिवर्सिटि ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस के शोध में इस खास प्रजाति के बारे में देखा गया कि इन्हें 6 महीने से पहले नपुंसक किये जाने पर इनमें ज्वाइंट डिसॉर्डर की आशंका 4 से 5 गुना बढ़ जाती है जैसे हिप डिस्प्लेसिया, क्रनियल क्रुशएट लिगामेंट टियर और एल्बो डिस्प्लेसिया। फीमेल गोल्डन में, 6 महीने की उम्र के बाद बधियाकरण किये जाने पर, उनमें लिम्फोसरकोमा, हीमनजिओसरकोमा और मास्ट सेल ट्यूर होने की आशंका 3 से 4 गुना बढ़ जाती है। इस शोध के कारण काफी विवाद हुआ और इस प्रजाति को दूसरी प्रजातियों से अलग माना गया है। अगर आप अपने गोल्डन रिट्रीवर को नपुंसक करवाने की सोच रहे हैं तो अपने पशु चिकित्सक से सलाह लें और सबसे अच्छी सलाह लें।

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