विवरणिका: भोजन में कैसे प्रवेश करता है सीसा?


विवरणिका: भोजन में कैसे प्रवेश करता है सीसा?

Photo: Shutterstock

नूडल्स में सीसे के अत्यधिक स्तर को का एक दिन मंज़ूरी मिल जाने संबंधी खबरें (भले ही इसमें एक सप्ताह लगे या एक महीना) डरावनी हैं। जिन उत्पादों को प्रतिबंधित किया गया है, परीक्षण में पास होने के बाद उनकी बिक्री फिर होने लगेगी। ऐसे में, उपभोक्तओं को यह समझना चाहिए कि भोजन में सीसा कैसे शामिल होता है और इसके बारे में क्या किया जा सकता है या क्या नहीं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अुनसार, यह ज्ञात नहीं है कि सीसे की कितनी मात्रा सुरक्षित है, और सीसे के संपर्क में आने के कारण हर साल 1,43,000 मौतें हो रही हैं, ज़्यादातर विकासशील क्षेत्रों में। हम नीचे विवरण दे रहे हैं कि भोजन में सीसे के शामिल होने को खत्म नहीं किया जा सकता इसलिए सरकार को यह तय करना चाहिए कि सीसे की कितनी मात्रा स्वीकार्य है।

भोजन में सीसे की मात्रा अलग-अलग खाद्य पदार्थों के हिसाब से अलग-अलग मंज़ूर है। उदाहरण के लिए, भारतीस खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा 2011 में तय किये नियमों के अनुसार, फल और सब्ज़ियों के रस में प्रति मिलयन पर एक पार्ट (पीपीएम) सीसा की मात्रा स्वीकार्य है, (पीपीएम का अर्थ है एक हज़ार किलोग्राम भोजन में एक ग्राम तक सीसा हो सकता है) जबकि सूखी चाय में 10 पीपीएम। शकर में 5 पीपीएम स्वीकार्य है जबकि हार्ड बॉइल्ड शकर की मिठाइयों में केवल 2 पीपीएम सीसा होना मंज़ूर किया गया है।

पर्यावरण का हिस्सा होने के कारण सरकार ने भोजन में सीसे का कुछ हिस्सा शामिल होने को मंज़ूर किया है। कुछ तो प्राकृतिक रूप से मौजूद है जबकि पर्यावरण में कुछ हद तक सीसा मानवीय गतिविधियों के कारण शामिल हुआ है। दुनिया भर में सबसे बड़े कारणों में शुमार है सीसा युक्त पेट्रोल। वर्ष 2000 में भारत ने सीसा रहित पेट्रोल का इरादा जताया और 2011 में यूएन ने भारत को सीसा रहित पेट्रोल देश घोषित किया। फिर भी, हवा में घुला मिला कुछ सीसा अब भी मिट्टी में समाया हुआ है। पर्यावरण में सीसे के कुछ और स्रोत औद्योगिक प्रक्रियाएं हैं जैसे सीसा-एसिड आधारित कार बैटरी और हाउस पेंट निर्माता उद्योग।

सीसा भोजन में कैसे आता है?

यूएस सरकार के फूड एड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, एक स्रोत है मिट्टी के ज़रिये। “मिट्टी में मिला सीसा पौधों, भोजन के लिए उगने वाले पौधे भी, द्वारा अवशोषित किया जाता है। पौधों में शामिल सीसे को कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, चाहे आप सब्ज़ियां धोकर या अन्य तरह से प्रोसेस कर इस्तेमाल करें।”

भोजन में प्रोसेसिंग के ज़रिये भी सीसा शामिल हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर फैक्ट्री में वॉटर पाइप या पेंट सीसा युक्त हो तो सीसा भोजन में शामिल हो सकता है। प्रसंस्करण के दौरान संदूषण का स्तर सरकार द्वारा तय किये गये स्तर से बढ़ सकता है। अगर ऐसा है तो, खाद्य निर्माताओं को ऐसा होने से बचाव करने की ज़रूरत है।

मुंबई में रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान में खाद्य इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर उदय अन्नापुरे ने वॉल सट्रीट जर्नल को बताया कि नूडल्स के उत्पादन में इस्तेमाल किया जाने वाला पानी संदूषण का एक संभावित स्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि सूप फ्लेवर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ पदार्थ कृशि की उपज हैं जैसे प्याज़ का चूर्ण या गेहूं का आटा, “कृषि स्रोतों से आने के कारण ये सीसे के संदूषण की चपेट में हो सकते हैं।”

संदूषण का एक और स्रोत पैकेजिंग ही हो सकती है, ज़रूरी नहीं कि पैकेट के अंदर रखा खाद्य पदार्थ ही सीसा युक्त हो। मैक्सिको के कैंडी निर्माताओं को एक बार यूएस सरकार ने अपने जहाज परिवहन के लिए रोका था क्योंकि पाया गया था कि रैपर में इस्तेमाल हुई स्याही और कागज़ में सीसे की हानिकारक मात्रा थी।

क्या नुकसान पहुंचाता है सीसा?

वाडिया अस्पताल के चिकित्सा निदेशक वाय के अमडेकर ने डीएनए को बताया, “शरीर की कई प्रक्रियाओं में सीसा हस्तक्षेप करता है। यह स्नायु तंत्र के विकास में भी बाधक है इसलिए विशेष रूप से बच्चों के लिए विषैला है। नियमित रूप से या लंबे समय तक खाने से सीखने या व्यवहार संबंधी स्थायी डिसॉर्डर हो सकते हैं। सीसे की अधिक मात्रा का सेवन करने पर जो लक्षण दिखते हैं उनमें पेट दर्द, भ्रम व संदेह, सिर दर्द, मानसिक विक्षिप्तता, एनिमिया, चिड़चिड़ाहट आदि हैं। अगर समस्या बढ़ती है तो कभी-कभी बच्चों को सर्जरी की ज़रूरत भी पड़ती है।”

सीसे के अन्य स्रोत

हाउस पेंट सीसे के संदूषण का एक बड़ा स्रोत है जो भोजन में नहीं बल्कि सीधे आपके घर में है। पेंट्स में सीसे को भारत में अब तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है। हालांकि कुछ बड़े ब्रांड कहते हैं कि उनके पेंट सीसा रहित हैं, लेकिन बहुत बड़ी संख्या में अब भी सीसे की बड़ी मात्रा शामिल है। ऐसा एक पर्यावरणीय एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक की जून 2015 की रिपोर्ट लिंक में बताया गया। टॉक्सिक्स लिंक का कहना है कि 2013 में भारतीय मानक ब्यूरो ने पेंट में सीसे की स्वीकार्य मात्रा को 1000 पीपीएम से घटाकर 90 पीपीएम किया था। यह सीमा यूएस और अन्य देशों के समान है। ब्यूरो के द्वारा तय किये जाने वाले मानक पूरी तरह से स्वैच्छिक हैं। तो हुआ यह, कि उदाहरण के लिए, 101 पेंट्स की जांच में से 32 में सीसे का स्तर 10,000 पीपीएम और उससे ज़्यादा पाया गया लेकिन ये वैधानिक रूप से बिक रहे हैं।

खुद को और बच्चों को कैसे बचाएं?

एक तरीका है कि भोजन में विविधता रखें और एक ही चीज़ कम समय के अंतराल में न खाएं। पीडी हिंदुजा अस्पताल में पेडियाट्रिशियन नितिन शाह ने डीएनए को बताया, “हम अभिभावकों को सलाह देते हैं कि बच्चों को मैगी जैसे इंस्टेंट फूड नियमित रूप से न खिलाएं। यह स्नैक आइटम हो सकता है लेकिन मुख्य भोजन नहीं।”

अभिभावक दूसरा कदम ये उठा सकते हैं कि घर में सीसे की मात्रा पर नज़र रखें। अगर आप अपने घर में पेंट करवा रहे हैं या लकड़ी के खिलौने खरीद रहे हैं तो जांचें कि पेंट सीसा रहित है या नहीं। जिनके घर में पहले से पेंट है और उन्हें चिंता है तो वे अपने बच्चों के खून की जांच करवाकर पता कर सकते हैं कि सीसे का स्तर क्या है। इस बारे में किसी पेडियाट्रिशियन से बात करें। दूसरे देशों में होम यूज़ के लिए सीसे के जांच की किट्स भी उपलब्ध हैं लेकिन अब तक भारत में उपलब्ध नहीं हैं।

यदि आप इस लेख में दी गई सूचना की सराहना करते हैं तो कृप्या फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक और शेयर करें, क्योंकि इससे औरों को भी सूचित करने में मदद मिलेगी ।

Leave a comment

Your email address will not be published.