ज़ुकाम और बच्चे


ज़ुकाम बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?

बच्चों में भी ज़ुकाम के कारण वही लक्षण दिखाई देते हैं जो व्यस्कों में दिखाई देते हैं, लेकिन वो इसे अधिक तीव्रता से अनुभव कर सकते हैं। बच्चों को बुखार भी आ सकता है और उनके शरीर का ताप 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि व्यस्कों को बुखार आना कम सामान्य है।

तीन माह से छोटे बच्चे के लिये, यह सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार का बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कितना हल्का है।

व्यस्क गले में खराश और नाक बंद होने के लक्षणों को पहचान कर ज़ुकाम की चपेट में आने का पता लगा सकते हैं, लेकिन नवजात शिशुओं और तीन साल से छोटे बच्चों के लिये यह कठिन हो सकता है, विशेषरूप से तब जब बच्चे ने अभी तक बोलना ना सीखा हो। माता-पिता और आया/देखभाल करने वाले केवल तभी समझ पाते हैं कि बच्चे को ज़ुकाम हो गया है जब बहती हुई नाक, खांसी या छींकने से लक्षण पूर्णरूप से दिखाई देते हैं।

आया/ देखभाल करने वाले को सांस लेने संबंधी समस्याओं को लेकर सर्तक रहना चाहिए। अधिकतर नवजात अपने मुंह के द्वारा सांस नहीं ले सकते ऐसे में अगर उनका नासिका मार्ग पूर्णरूप से अवरूद्ध हो जाता है, यह एक गंभीर समस्या हो सकती है। हांफना, नथूने चौड़े होना, पसलियों के उपर या नीचे की त्वचा का सिकुड़ना-फैलना और विशेषकर होठों या उंगलियों के पोरों पर नीलापन आ जाना ये सब इस बात के लक्षण हैं कि बच्चे को सांस लेने में समस्या हो रही है और तुरंत डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता है।

नासिका मार्ग का अवरूद्ध हो जाना नवजात के लिये स्तनपान को भी कठिन बना देता है। इस मामले में सबसे बेहतर यह है कि नीचे दिये हुए उपचार से इसे खोलने का प्रयास किया जाये।

थोड़े से बड़े बच्चे के लिये भी यह बताना कठिन हो सकता है कि नासिका मार्ग के अवरूद्ध होने से नाक से सांस लेना कठिन है। हालांकि वो यह पता लगा सकते हैं कि मुंह से सांस कैसे ली जाती है, ऐसा करते समय उन्हें अत्यधिक परेशानी हो सकती है।

बच्चों में ज़ुकाम के उपचार के लिये क्या किया जा सकता है?

जिन बच्चों को ज़ुकाम है उनके लिये सबसे अच्छी चीज़ यह हो सकती है कि उनके शरीर में पानी की कमी ना होने दी जाये ताकि वो विषाणुओं को दूर करने के लिये म्युकस का निर्माण कर सकें और ये सुनिश्चित हो सके कि वो आराम से सांस ले सकें। नवजात के लिये दूध नमी/हाइड्रेशन उपलब्ध कराता है, थोड़े बड़े बच्चों के लिये पानी या साफ तरल पदार्थ (साफ सूप, पतला फलों का रस) इसके अच्छे स्त्रोत हैं।

मेडिकल स्टोर से खरीदा हुआ लवणयुक्त नैज़ल स्प्रे या घर में बने हुए नमक के पानी की बूंदे बंद नाक को खोलने में सहायता कर सकती हैं। यह सुनिश्चित करें कि साफ-सुथरे ड्रॉपर और विशुद्ध जल का उपयोग करें। प्रत्येक नथूने में नमक के पानी की दो बूंदे म्युकस को निकालने में सहायता कर सकती हैं जो नाक को अवरूद्धद कर रहा है। अब भारत में भी कुछ शिशु-केंद्रित दुकानों में सक्शन बल्ब बिकने लगे हैं जिनका उपयोग भी नाक को खोलने और म्युकस को हटाने के लिये किया जा सकता है।

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